Gratuity calculation: 5 साल की नौकरी पर कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी? जानिए पूरा हिसाब

अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹20,000 है और आपने एक ही कंपनी में 5 साल पूरे कर लिए हैं तो क्या आपको नौकरी छोड़ते वक्त करीब ₹58,000 अलग से मिल सकते हैं? जी हाँ, ये पैसा आपकी सैलरी का हिस्सा नहीं है, ये ग्रैच्युटी है यानी लंबे समय तक कंपनी में काम करने के बदले मिलने वाला एक फाइनेंशियल बेनिफिट। लेकिन यहाँ एक इंपॉर्टेंट बात है, ग्रैच्युटी का हिसाब आपकी पूरी सैलरी यानी सीटीसी पर नहीं होता, कैलकुलेशन में आपकी लास्ट ड्रॉन वेजेस देखी जाती है। सामान्य तौर पर ग्राचुटी कैलकुलेशन के लिए बेसिक और एप्लिकेबल डीए को देखा जाता है तो अगर आपका बेसिक प्लस डीए ₹20,000 है और सर्विस 5 साल की है तो आपका ग्राचुटी कैलकुलेशन कैसा होगा आइए समझते हैं सबसे पहले समझते है की ग्रैच्युटी आखिर है क्या? ग्रैच्युटी एक लम्प सम अमाउंट है जो एलिजिबल एम्प्लोयी को नौकरी खत्म होने पर मिल सकती है। रेगुलर एम्प्लोयी के लिए सामान्य रूल में एक ही एम्प्लोयर के साथ 5 साल की कंटिन्युस सर्विस पूरी करना जरूरी होता है। ये बेनिफिट रेजिनेशन, रिटायरमेंट या कुछ दूसरी एलिजिबल सिचुएशन्स में मिल सकता है। लेकिन अगर एम्प्लोयी की डेथ या डिसएबलमेंट हो जाए तो 5 साल वाली कंडीशन लागू नहीं होती। इसके अलावा फिक्स टर्म employees ke liye alag provisions hain isiliye har employee par bilkul ek jaisa rule lagoo nahi hota ab samajhte hain iski calculation gratuity nikalne ka formula kafi simple hain last drawn wages ko 15 se multiply kiya jaata hain fir service ke years se multiply karke 26 se divide kiya jaata hain yani formula hua last drawn wages into 15 into completed years of service divided by 26 ab ise ek example se samajhte hain मान लीजिए आपकी बेसिक प्लस डीए यानी कैलकुलेशन के लिए सैलरी ₹20,000 है। आपने कंपनी में 5 साल काम किया है तो कैलकुलेशन होगी 20,000 x 15 x 5 / 26 इसका जवाब आता है करीबन ₹71,692 यानी 5 साल की एलिजिबल सर्विस पूरी होने पर इस एग्जाम्पल में ग्राच्युटी ₹71,692 बनती है। लेकिन यहाँ एक बहुत कॉमन कन्फ्यूजन है अगर आपकी सैलरी ₹20,000 है। इसका मतलब ये जरूरी नहीं है की आपकी ग्रेच्युटी कैलकुलेशन भी 20,000 पर ही होगी। आपको अपनी सैलरी स्लिप में बेसिक और ऐप्लिकेबल डीए देखना होगा। मान लीजिए आपकी टोटल मंथली सैलरी 40,000 है लेकिन बेसिक प्लस डीए 20,000 है तो ऊपर वाले एग्जाम्पल में कैलकुलेशन 40,000 पर नहीं होगी। यानी ग्रेच्युटी समझने के लिए सबसे पहले अपनी सैलरी स्ट्रक्चर देखना बहुत जरूरी है और यही वजह है की सिर्फ सीटीसी देखकर अपनी ग्रेच्युटी का अंदाजा लगाना सही नहीं है। अब एक और जरूरी सवाल क्या एग्जैक्टली 5 साल पूरे करना जरूरी है? सामान्य रूल में कंटिन्युअस सर्विस 5 साल की होनी चाहिए, लेकिन सर्विस पूरी होने के बाद एक्स्ट्रा मंथ्स का भी असर पड़ता है। अगर आपकी सर्विस 5 साल 4 महीने है तो कैलकुलेशन में 5 साल ही लिया जाएगा। लेकिन अगर आपकी सर्विस 5 साल 7 महीने है तो 6 महीने से ज्यादा का हिस्सा अगले पूरे साल के रूप में काउंट किया जाता है। यानी 5 साल 7 महीने को 6 साल माना जाएगा। इसलिए अगर आप रेजिगनेशन की प्लानिंग कर रहे हैं तो सिर्फ जॉइनिंग डेट नहीं, अपनी एग्जैक्ट सर्विस पीरियड भी जरूर चेक करें। अब इसे पैसे के हिसाब से समझते हैं। अगर कैलकुलेशन सैलरी ₹20,000 पर हो रही है तो 5 साल पर करीब ₹71,692 ग्रैच्युटी बनती है। अगर एलिजिबल सर्विस 6 साल हो जाए तो यही कैलकुलेशन करीब ₹69,231 तक पहुँच जाती है। यानी सिर्फ 1 साल की सर्विस बढ़ने से इस एग्जाम्पल में करीब 11,538 का डिफरेंस आता है। इसीलिए जॉब स्विच करते समय सिर्फ नई कंपनी की सैलरी मत देखिए। अगर आपकी करेंट कंपनी में ग्राच्युटी का बेनिफिट मिलने वाला है तो अपनी सर्विस पीरियड और एक्स्पेक्टेड ग्राच्युटी को भी ध्यान में रखिए। अब बात करते हैं टैक्स की। ग्राच्युटी पर टैक्स ट्रीटमेंट इस बात पर डिपेंड करता है कि आप किस कैटेगरी में आते हैं और कौनसा रूल आपके एम्प्लॉयमेंट पर लागू होता है। इनकम टैक्स रूल्स के तहत एलिजिबल नॉन गवर्नमेंट एम्प्लॉय के लिए सेक्शन 10 के तहत एक्सम्प्शन की लिमिट 20 लाख तक हो सकती है। सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉय के लिए एक्सम्प्शन रूल्स अलग है और करेंट टैक्स प्रोविशंस के मुताबिक लिमिट 25 लाख तक हो सकती है। इसलिए सिर्फ ये मान लेना कि हर एम्प्लॉय की पूरी ग्रेच्युटी ऑटोमेटिकली टैक्स फ्री होगी सही नहीं है। अगर आपकी ग्रेच्युटी छोटा अमाउंट है, जैसे हमारे एग्जाम्पल में करीब तो ये लिमिट से काफी कम है। फिर भी फाइनल टैक्स ट्रीटमेंट आपकी एम्प्लॉयमेंट कैटेगरी और ऐप्लिकेबल रूल्स के हिसाब से देखना चाहिए। अब सबसे काम की बात अगर आप जॉब स्विच करने वाले हैं तो रेजिनेशन देने से पहले अपनी जॉइनिंग डेट जरूर चेक करें। अपनी सैलरी स्लिप निकालें और बेसिक प्लस डीए देखें। फिर अपनी टोटल सर्विस को कैलकुलेट करें क्योंकि अगर आप 5 साल के बहुत करीब हैं तो कुछ महीनों और काम करके से ग्राच्युटी एलिजिबिलिटी और अमाउंट दोनों पर फर्क पड़ सकता है और अगर आप 5 साल से ज्यादा काम कर चूके हैं तो 6 महीने वाले रूल को भी जरूर ध्यान में रखें यानी रेसिगनेशन से नोटिस पीरियड देखकर डिसाइड मत कीजिए अपने पेंडिंग सैलरी बेनिफिटस भी कैलकुलेट कीजिए आपकी जरूरत से जुड़ी ऐसी ही और भी वीडियो के लिए देखते रहें जी बिज़नेस