सपा की वापसी का मतलब रंगदारी-माफियाराज, बृजलाल का सपा पर निशाना; 2027 चुनाव को लेकर कही ये बात

हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में भाजपा के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। बृजलाल ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की आक्रामक और अराजक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उन्होंने संतकबीरनगर के गणेशोत्सव विवाद, रायबरेली में पुलिस से अभद्रता और 2011 के मुरादाबाद मैनाठेर कांड का जिक्र करते हुए सपा शासनकाल और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी।

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संतकबीरनगर और रायबरेली की घटनाओं का किया जिक्र

बृजलाल ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि संतकबीरनगर में गणेश चतुर्थी के दौरान श्रद्धालुओं के जुलूस को लेकर विवाद हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सपा सांसद पप्पू निषाद ने अपनी गाड़ी रोककर लोगों को धमकाया और धर्म-कर्म पर सवाल खड़े किए। बृजलाल के मुताबिक, इसका स्थानीय रामभक्त निषाद समाज ने विरोध किया।

उन्होंने रायबरेली की घटना का भी उल्लेख किया, जहां सपा जिलाध्यक्ष और पुलिस अधिकारियों के बीच विवाद हुआ था। बृजलाल ने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिस अधिकारियों से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और हाथापाई की स्थिति बन गई। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने संयम नहीं बरता होता तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।

बृजलाल ने आरोप लगाया कि पहले पुलिस पर हमला करना और उसके बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाकर खुद को पीड़ित बताना सपा की पुरानी रणनीति रही है।

मुरादाबाद के मैनाठेर कांड का भी उठाया मुद्दा

बृजलाल ने 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद के मैनाठेर क्षेत्र में हुए हिंसक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले अफवाह फैलने के बाद थाने और पुलिस चौकी पर हमला हुआ था और सरकारी वाहनों को आग लगा दी गई थी। उनके मुताबिक, तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह जब पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तो उन पर भी हमला किया गया।

मैनाठेर मामले में अदालत ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के रिकॉर्ड पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमला, पुलिस चौकी में आगजनी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत दोषसिद्धि हुई।

बृजलाल ने आरोप लगाया कि 2012 में सत्ता में आने के बाद तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने डीआईजी पर हमले से जुड़े मुकदमे को वापस लेने की कोशिश की थी और कुछ अन्य मामलों में भी कार्रवाई प्रभावित की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान डीआईजी को छोड़कर भागने वाले बर्खास्त पुलिसकर्मियों को बाद में बहाल कर मनचाही तैनाती दी गई। इन दावों को बृजलाल ने अपने बयान में उठाया; उपलब्ध हालिया अदालती रिपोर्टें मैनाठेर मामले में 16 दोषियों की उम्रकैद की पुष्टि करती हैं।

सपा शासन को लेकर बृजलाल ने लगाए ये आरोप

पूर्व डीजीपी ने सपा शासनकाल का जिक्र करते हुए मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और विजय मिश्रा जैसे बाहुबलियों का नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में व्यापारियों से रंगदारी वसूली, जमीनों पर अवैध कब्जे और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं सामने आती थीं।

बृजलाल ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने अवैध कब्जों से जमीन मुक्त कराकर गरीबों के लिए आवास बनाए हैं। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के गार्जियानो कांड और मिल अफसरों की हत्याओं का भी जिक्र किया।

'सपा की वापसी का मतलब रंगदारी और माफियाराज'

बृजलाल ने आरोप लगाया कि यदि सपा दोबारा सत्ता में आती है तो व्यापारियों के उत्पीड़न, लूट और आगजनी जैसी घटनाएं फिर बढ़ सकती हैं। उन्होंने रामपुर में गोकशी से जुड़े मामलों का भी जिक्र करते हुए सपा शासन की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।

उन्होंने प्रदेश की जनता से 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सतर्क रहने की अपील की और सपा के कथित 'मायावी जाल' से दूर रहने की बात कही।

कानून-व्यवस्था को बनाया 2027 का प्रमुख मुद्दा

बृजलाल ने अपने बयान में 2027 के विधानसभा चुनाव को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि जनता को पिछले शासनकाल की घटनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रति अपने समर्थन की बात भी कही और कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर 100 प्रतिशत विश्वास रखते हैं।

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