विज्ञान और तकनीक 2 min read

आदित्य-L1 ने सौर विस्फोट के असममित प्रसार का खुलासा किया, अंतरिक्ष मौसम की समझ में नई प्रगति

भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला **आदित्य-L1 (Aditya-L1)** ने सौर विस्फोटों के प्रसार को लेकर नया खुलासा किया है। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA) के...

चर्चा में क्यों?

भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला **आदित्य-L1 (Aditya-L1)** ने सौर विस्फोटों के प्रसार को लेकर नया खुलासा किया है। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, **कोरोनल मास इजेक्शन (CME)** पारंपरिक धारणा के विपरीत एक समान (Symmetrical Bubble) रूप से नहीं, बल्कि **असममित (Asymmetric)** रूप से फैलते हैं।

मुख्य विशेषताएं / प्रमुख बिंदु:

- अध्ययन और निष्कर्ष ('द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' में प्रकाशित):

- 5 अगस्त 2024 को हुए एक CME अध्ययन में IIA वैज्ञानिकों ने आदित्य-L1 के मुख्य पेलोड **VELC**, नासा के **SDO (Solar Dynamics Observatory)** के डेटा और 3D मॉडल का उपयोग कर सौर विस्फोट की 3D संरचना तैयार की।

- VELC के स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा ने डॉप्लर शिफ्ट (Doppler Shift) के ज़रिए प्लाज्मा की 3D गतिशीलता (Line-of-Sight motion) दर्ज की, जिससे इसकी असममित lateral expansion (झुकाव वाली धुरी) का पता चला।

- VELC पेलोड की भूमिका:

- दृश्यमान उत्सर्जन रेखा कोरोनाग्राफ (**VELC**) को **IIA (होगकोटे, बेंगलुरु)** द्वारा ISRO के सहयोग से विकसित किया गया है। यह 530.3-नैनोमीटर की हरी उत्सर्जन रेखा (Green Emission Line) में कोरोना का अध्ययन करता है।

- अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) पर प्रभाव:

- CMEs के असममित प्रसार से उनकी गति और सौर हवा (Solar Wind) के साथ अंतःक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पृथ्वी पर सौर तूफानों के पहुँचने के समय और उपग्रहों व संचार प्रणालियों पर पड़ने वाले प्रभाव का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।

---

स्टैटिक जीके फैक्ट्स (Static GK Facts):

- आदित्य-L1 मिशन (Aditya-L1 Mission):

- लॉन्च तिथि: **2 सितंबर 2023** (PSLV-C57 रॉकेट द्वारा) | स्थान: **सूर्य-पृथ्वी L1 बिंदु (Lagrange Point 1)**।

- कुल पेलोड: **7** (मुख्य पेलोड: VELC)।

- भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA - Indian Institute of Astrophysics):

- मुख्यालय: **बेंगलुरु, कर्नाटक** (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान)।

- ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन):

- स्थापना: **15 अगस्त 1969** | मुख्यालय: **बेंगलुरु**।

वन-लाइनर क्विज़ (All Competitive Exams):

Q: आदित्य-L1 के किस प्राथमिक पेलोड ने सौर विस्फोटों (CMEs) के 3D और असममित प्रसार का खुलासा किया है?

A: VELC (Visible Emission Line Coronagraph)

Q: आदित्य-L1 मिशन को सूर्य-पृथ्वी के किस लाग्रांज बिंदु (Lagrange Point) पर स्थापित किया गया है?

A: L1 बिंदु (L1 Point)

Q: VELC पेलोड को किस प्रमुख संस्थान द्वारा ISRO के सहयोग से विकसित किया गया था?

A: IIA (भारतीय ताराभौतिकी संस्थान, बेंगलुरु)

#AdityaL1 #ISRO #IIA #VELC #SpaceWeather #SunEruption #CurrentAffairs #StaticGK

More in विज्ञान और तकनीक

View all
विज्ञान और तकनीक

सहारा रेगिस्तान में खोजा गया 4.1 अरब साल पुराना मंगल ग्रह का दुर्लभ उल्कापिंड 'तेघाज़ा 001'

शोधकर्ताओं ने साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में खुलासा किया है कि चार साल पहले **सहारा रेगिस्तान** में पाई गई साधारण दिखने वाली गुलाबी रंग की चट्ट...

Read article
विज्ञान और तकनीक

ISRO ने GSLV-F18 से NVS-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने **30 अक्टूबर 2026 की रात 11:51 बजे** श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से **GSLV-F18** र...

Read article
विज्ञान और तकनीक

इसरो (ISRO) श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट द्वारा नेविगेशन उपग्रह NVS-03 करेगा लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (**ISRO**) सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) के द्वितीय लॉन्च पैड से **GSLV-F18** रॉकेट के माध्यम से नेविगे...

Read article
विज्ञान और तकनीक

वैज्ञानिकों ने चीन में खोजा 23.7 करोड़ वर्ष पुराना पहला पूर्णतः समुद्री आदिम उभयचर जीवाश्म 'जेरोथोरैक्स मैरिटिमस'

चीन के गुइझोउ प्रांत में वैज्ञानिकों ने लगभग **23.7 करोड़ वर्ष पुराने** पहले पूर्णतः समुद्री आदिम उभयचर (fully marine stem amphibian) के अति-संरक्षित जीवाश्म...

Read article

Continue your exam preparation journey.

or continue with email