CSIR-NIScPR द्वारा पारंपरिक ज्ञान के संचार पर तीसरी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (CDTK-2026) का आयोजन नई दिल्ली में
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (**CSIR-NIScPR**) द्वारा नई दिल्ली स्थित CSIR-NPL में **पारंपरिक ज्ञा...
चर्चा में क्यों?
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (**CSIR-NIScPR**) द्वारा नई दिल्ली स्थित CSIR-NPL में **पारंपरिक ज्ञान के संचार और प्रसार पर तीसरी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (CDTK-2026)** का आयोजन किया गया।
मुख्य विशेषताएं / प्रमुख बिंदु:
- उद्घाटन एवं मुख्य अतिथि:
- सम्मेलन का उद्घाटन **डॉ. जोरम अनिया (Dr. Joram Aniya), सदस्य, नीति आयोग** की मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
- उन्होंने 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पारंपरिक ज्ञान और अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी पद्धतियों को नीति निर्माताओं तक पहुँचाने पर जोर दिया।
- प्रमुख प्रकाशन और विमोचन:
- इस अवसर पर संगोष्ठी की 'स्मारिका और सार पुस्तिका' (Souvenir & Abstract Book), **'SVASTIK Stories' (Vol. III)**, तथा असमिया और मैथिली भाषाओं में 'ट्रेजर ऑफ इंडियन ट्रेडिंस' (Treasure of Indian Traditions) फ्लिपबुक का विमोचन किया गया।
- प्रमुख सत्र एवं चर्चाएं:
- **पहला वैज्ञानिक सत्र:** 'पारंपरिक ज्ञान का प्रलेखन, सत्यापन और संचार' विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें WHO और UNESCO के सहयोग पर चर्चा हुई।
- **दूसरा वैज्ञानिक सत्र:** 'पारंपरिक ज्ञान में पर्यावरण चेतना और आधुनिक जलवायु रणनीतियाँ' पर केंद्रित था।
- **विशेष पैनल चर्चा:** पारंपरिक ज्ञान के डिजिटलीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बौद्धिक संपदा अधिकार (WIPO) और TKDL (ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी) की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
स्टैटिक जीके फैक्ट्स (Static GK Facts):
- CSIR-NIScPR (CSIR-National Institute of Science Communication and Policy Research):
- मुख्यालय: **नई दिल्ली** | निदेशक: **डॉ. गीता वाणी रायसम (Dr. Geetha Vani Rayasam)**।
- SVASTIK पहल:
- पूर्ण रूप: **Scientifically Validated Societal Traditional Knowledge** (वैज्ञानिक रूप से सत्यापित सामाजिक पारंपरिक ज्ञान)।
- उद्देश्य: वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर भारतीय पारंपरिक ज्ञान को डिजिटल माध्यमों से समाज तक पहुँचाना।
- TKDL (Traditional Knowledge Digital Library):
- स्थापना: **2001** (CSIR और आयुष मंत्रालय की संयुक्त पहल)।
- कार्य: भारत के पारंपरिक ज्ञान (आयुर्वेद, योग आदि) को पेटेंट दुरुपयोग से बचाना।
वन-लाइनर क्विज़ (All Competitive Exams):
Q: पारंपरिक ज्ञान के संचार और प्रसार पर तीसरी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (CDTK-2026) का आयोजन किस संस्थान द्वारा किया गया?
A: CSIR-NIScPR (नई दिल्ली)
Q: CSIR-NIScPR की किस पहल के तहत वैज्ञानिक रूप से सत्यापित पारंपरिक ज्ञान का प्रसार किया जा रहा है?
A: SVASTIK (Scientifically Validated Societal Traditional Knowledge)
Q: पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) की स्थापना संयुक्त रूप से किस वर्ष की गई थी?
A: वर्ष 2001 में
Q: वर्तमान में CSIR-NIScPR की निदेशक (Director) कौन हैं?
A: डॉ. गीता वाणी रायसम (Dr. Geetha Vani Rayasam)
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