PAK ने फिर खड़ा किया आतंकी अड्डा, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहावलपुर से सामने आईं तस्वीरें

  • बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का कैंप दोबारा तैयार होने का दावा किया जा रहा है
  • यह वही कैंप है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त किया गया था. खबर है कि इसे फिर खड़ा करने की तैयारी है
  • इंटेलिजेंस इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान से करीब 25 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलने की खबर है
  • सेंट्रल हॉल के पुनर्निर्माण पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा है

पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का कैंप फिर से शुरू होने की खबर सामने आई है. खुफिया एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि नई तस्वीरों में कैंप में नया मार्बल, प्लास्टर और पेंट देखा गया है, वहीं हमले में क्षतिग्रस्त हुए गुंबदों को दोबारा बना दिया गया है. सेंट्रल हॉल में बने इम्पैक्ट क्रेटर्स को भरकर फिर से पूरा ढांचा खड़ा कर दिया गया है. बता दें यह वही ठिकाना है, जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान निशाना बनाया था. दुश्मन पर यह कार्रवाई 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई थी, जिसमें करीब 26 लोगों की जान गई थी.

कैंप दोबारा शुरू करने के लिए PAK ने दिए 25 करोड़

इंटेलिजेंस इनपुट के मुताबिक, जैश के इस ठिकाने को दोबारा तैयार करने के लिए पाकिस्तान की तरफ से करीब 25 करोड़ दिए गए हैं. इनमें से करीब 11 करोड़ रुपये सिर्फ सेंट्रल हॉल को दोबारा बनाने में खर्च होने की बात कही जा रही है. कैंप से जुड़े मदरसा अल-सबीर और जैश कमांडरों के रिहायशी हिस्सों को भी साफ किया गया है और वहां नया निर्माण किया जा रहा है. बता दें कि इससे पहले जैश की तरफ से कैंप के पुनर्निर्माण के लिए क्राउड फंडिंग की अपील की खबरें सामने आई थीं.

सैटेलाइट तस्वीरें पहले से ही दे रहीं थीं संकेत

अप्रैल और मई में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में कैंप के अंदर भारी मशीनरी, निर्माण वाहन और मलबा हटाने का काम भी दिखाई दिया. क्षतिग्रस्त गुंबदों पर गहरे रंग की नई सीमेंट की परत भी नजर आई, जिससे संकेत मिला था कि मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है. अब नई तस्वीरों से पता चलता है कि पूरा परिसर फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाया जा रहा है. करीब 18 एकड़ में फैला यह कैंप, जिसे उस्मान-ओ-अली कैंपस भी कहा जाता है. यह भारत की सीमा से लगभग 100 किलोमीटर दूर है और यहां भर्ती, ट्रेनिंग और कैडर की विचारधारा से जुड़ी गतिविधियां चलने का आरोप रहा है.

भारत के लिए चिंता वाली बात...

बता दें मरकज सुभान अल्लाह काफी टाइम से जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियों से जुड़ा रहा है. इस संगठन का नाम 2001 संसद हमले, 2016 पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 पुलवामा हमले जैसे बड़े आतंकी मामलों में सामने आया है. कई रिपोर्ट्स में पुलवामा हमले की साजिश में भी इस कैंप का नाम बताया गया था. भारत के हमले में जैश प्रमुख मसूद अजहर के रिश्तेदारों समेत 13 लोगों के मारे जाने की बात सामने आई थी. यह कैंप लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में और पाकिस्तान आर्मी के 31 कोर के कैंटोनमेंट के पास स्थित है. ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर में तबाह किए गए आतंकी ढांचे का दोबारा खड़ा होना, भारत के लिए चिंता वाली बात है.