Gram Chikitsalay star cast: Dinesh Lal Yadav, Amol Parashar ने social media इलाज पर रखी राय
नमस्कार हम प्रशांत और बात करेंगे उस जिंदगी की जो बहुत से लोगों ने शायद ना देखी हो क्योंकि जो लोग शहरों में रहते हैं उनको गांव की जिंदगी के बारे में शायद उतना अंदाजा नहीं होता। लेकिन जो लोग गांव की जिंदगी देख चूके हैं वहाँ की जिंदगी में कुछ खट्टे मीठे पल, कुछ मज़ाकिया, कुछ पल ऐसे आपको नजर आएँगे और उन्हीं। आपको मेरे ख्याल में काफी वक्त से हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री और जो नया एक माध्यम है ओह टी डी प्लैटफॉर्म्स को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और बहुत लोगों ने पसंद भी किया है। आज हम बात कर रहे हैं ग्राम चिकित्सालय की और हमारे साथ है की कॉल। बहुत बहुत शुक्रिया। बात करने के लिए मैं सवाल पूछता जाऊंगा, इंट्रोड्यूस करता जाऊंगा तो दिनेश जी सबसे पहले मैं आपसे ये पूछना चाहूंगा की एक भोजपुरी सिनेमा से निकल के और धीरे धीरे जो आप अपने पंजे जमा रहे हैं। वेब सीरीज पे ओह टी पी पे आपको ये अपनी नई पारी मजेदार लग रही है और कितना मज़ा आ रहा है क्योंकि एक अलग तरह का काम आपको करने को मिल रहा है बहुत मज़ा आ रहा है और जब जो हमारे दर्शक है। जब हमारे दर्शकों को कोविद के बाद ज्यादा समय बिताने के लिए ओटी प्लेटफार्म ने बहुत सारा कंटेंट ला दिया तो फिर हमें भी वही जो हम देखते हैं। खुद। हम भी घर में बैठते तो हम ग्राम पंचायत पंचायत देखते हैं, ग्राम चिकित्सालय देखते हैं तो जो हम अपने परिवार के साथ देखते हैं, जब उसी में अपने को काम करने को भी मिलता है तो मुझे लगता है कि इससे बड़ी अः खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती है। की जो हम देख रहे हैं अपने परिवार के साथ देख रहे हैं, उसी शो का पार्ट हम भी बन पा रहे हैं तो ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। मेरे ख्याल में आप दोनों से भी मैं पूछना चाहूंगा, मेरे ख्याल में आकांक्षा रीच जो होती है, वेब के जो ओह टी डी सीरीज होती है, उनकी रीच कहीं ज्यादा होती है। अगर हम बनस्पत फिल्मों के बात करें तो कई बार फिल्मों अच्छी होती है लेकिन वहाँ तक नहीं पहुँच पाती। लेकिन जितनी कंट्रीज़ में वेब सीरीज जाती है आप लोग पहली सीज़न कर चूके हैं और जो पहला सीज़न था उसके बाद आपको अंदाजा होगा लेकिन जब आपको आगे लोग मिलते होंगे और बोलते होंगे कि यार हमने वो देखा और हमें अच्छा लगा। कितने ऐसे वाक्यत हुए आप लोगों के साथ और आप क्या बोलेंगे? रीच के बारे में अगर मैं पूछ आई थिंक ये सीज़न से पहले ही मेरा मैंने अभी तक सिर्फ ओह टीटी पे काम किया है तो मेरे पहले पिक्चर से मुझे एक अंदाजा आ गया था गिलटी हाँ जीके 1 मिनट मेरी मेरी फैम्ली जो अमेरिका में रहती है। मतलब जब मैंने देखा 12:00 बजे यहाँ रिलीज़ हुआ, वहाँ उन लोगों ने देखा एंड आई सैड वॉव, ये कभी नहीं होता अगर मेरी पिक्चर थिएटर में रिलीज़ होती की मेरे भाई, बहन, मामी सबने देखा। सबने एक साथ देख लिया और उनके गोरे दोस्तों ने देख लिया और वो मेरे को मैसेज कर रहे हैं और फिर जब यू नो। कुछ रिलीज़ होता है। फिर यू नो दी दी दी प्लेटफार्म पूठ के नंबर वॅन नहीं, हियर नंबर वॅन टू हियर और हमने कहा कहा जगाये मलेशिया में यहाँ में वह पे सो दट, वास् दी फर्स्टलाइजेशन के ओके ओह टीटी गोज़ फार एंड बियॉन्ड। तो जब लोग कभी कभी पूछते हैं की यू नो ओह टीटी कर रहे हो? थिएटर का दिल नहीं लगता हाँ वो तो करना ही है पर ये कुछ कम चीज़ नहीं है। एग्ज़ैक्ट्ली तो आई फील और यहाँ पे भी अभी ग्राम के बाद आई हॅव रीचड सच ए डिफरेंट ऑडिएंस जो टी वि ऐफ़ का कॅन्टेंट देखता है और पीपल वो मुझे जानते ही नहीं थे। यू नो अभी मुझे ग्राम के थ्रू जानते सो इट्स इट्स इट्स ग्रेट यार इट्स ए वेरी डिफरेंट इट्स ए डिफरेंट ऑडिशन बट सीरीज में आप डिफरेंट दिखती है, ऐसे अलग दिखती है अच्छा अच्छी बात है ऑन ए लाइटर नोट अमूल मैं पूछना चाहूंगा टीबी ऐफ़ को आइआइटी एम से प्रॉब्लम है क्या? प्रॉब्लम नहीं है। वो तो सबको उन्होंने ऐक्टर बनाके लिख के आ रहे क्या वो है और मुझे लग रहा है कि वहाँ पे ना इंजीनियरिंग या वो पढ़ाई नहीं हो रही है। वहाँ अक्टिंग इन्स्टिट्यूट एक गलत हो चुका है। हम काफी सारे दिख रहे हैं। बट है कमी। मेरे मैच में अगर 60 लोग थे तो मतलब मेरे डिपार्टमेंट में 60 लोग थे तो मैं एक ही हूँ बाकी सारे उससे पहले जीतू हाँ मतलब वो मैं अपनी क्लास की बात कर रहा हूँ। आई टी दिल्ली में वो खड़गपुर से है। तो अगर अगर 1000 लोग हैं तो उनमें से हम 10 है जो यहाँ पे है पर हाँ, अब वो क्या चक्कर है कि हम 10 दिखते हैं? हम वो काम करते हैं जो दिखता है। हम इंटरव्यू देते हैं, ऐसे ऐसे कपड़े पहन के आते हैं, फोटो खिंचाते हैं, नीचे जाके पेप्स स्पॉटिंग करते हैं। बहुत सारे जो 919 अलग लोग हैं वो कर रहे हैं, नौकरियां कर रहे हैं और अपना जो काम जो शायद हम कर रहे होते हैं वो कर रहे हैं। बट येस इन दी लास्ट 1520 इयर्स स्पेशल आफ्टर टी वि ऐफ़ एक तादाद बढ़ी है। ये मैं मानता हूँ और इसकी मेरी बड़ी सारी थियरीज है। ये ऐसा क्यों है, क्यों नहीं है? आई थिंक टी वि ऐफ़ के जो क्रियेटर्स है उनमे से भी कुछ लोग हाँ तो टी वि ऐफ़ की जो कोड टीम थी, जो शुरू हुई वो आइआइटी के लोग थे अरुणाब खुद आई आइडी खड़गपुर से है। जीतू आइडी खड़गपुर से है बिस्वजीत सरकार जो रैटर थे टी वि ऐफ़ में थे। अभी नहीं है। वो आइआइटी खड़गपुर से है। समीर सक्सेना आइआइटी बॉम्बे से है। दीपक कुमार मिश्रा आइआइटी बॉम्बे से है आईएम रौम, आइआइटी दिल्ली कितने सारे गिना दिए उन्होंने क्योंकि हम एकदम से आए शहर में और मुझे लगा मैं अकेला होगा और कोई नहीं होगा और फिर एकदम से छे सात मिल गए सब भटकते हुए गलियों में। और और वो अरुनाब का टैलेंट और वो था क्या? साथ में रहो, साथ में रहो, साथ में रह के करेंगे, कुछ करेंगे, कुछ करेंगे, कुछ करेंगे। मैं मेरा और रुझान थिएटर अक्टिंग की तरफ था तो वहाँ पर उतना अलाइनमेंट नहीं था। थिएटर ऐक्टर तो बस करता है, अपना करता है। इसमें टीम क्या चाहिए उसके लिए? बट बाकी लोगों का आई थिंक बना डाइरेक्टर बनने की तरफ लिखने की तरफ था तो उनको था कि साथ में मिलकर कुछ बनाते हैं, साथ में मिलकर कुछ बनाते हैं एंड वहाँ से इन्हीं बातों में से टी वि ऐफ़ निकला सो ये इवन ये मुहिम शुरू करने का क्रेडिट अरुणा का है कि यार इकट्ठे हो जाओ, तुम कहाँ बिखरे हुए हो सब यार हम? एक दूसरे को समझते हैं तो फायदा ये होता है एक दूसरे को समझता है भाषा सेम होती है आपकी वर्ल्ड यू सेम होता है, पढ़ाई सेम होती है, बैकग्राउंड मोर ऑर लेस्स आपका सेम होता है फैम्ली बैकग्राउंड और आप नई जगह पे आप आते हैं तो कल्चरल डिफरेंस होते हैं। कल्चरली वी अरे सिमिलर ये ऐसा वाला तो नहीं था की जैसे बचपन में जब आप दिल्ली से या उत्तर प्रदेश से बिहार से आप आते हैं तो वहाँ पे माँ बाप बोलते हैं कि बेटा पढ़ लो फिल्मों विलमो में जाने का कोई जरूरत नहीं, पहले खुद को प्रुव कर लेता हूँ, मैं इंजीनियर बन जाता हूँ। और उसके बाद फिर मैं देखूंगा। उसके बाद माँ बाप का बोलने का वजन थोड़ा कम हो जाता है कि अब मैं अब मेरे को करने दो, थोड़ा कुछ आई थिंक यही हुआ होगा बहुत लोगों के साथ और उसके बाद लेकिन आई थिंक क्या हुआ है क्योंकि इस पूरे ग्रुप ने एक अपनी जगह बनाई। और एक तरह का नाम कमाया अपने आपको प्रुव किया। अब हमारे पीछे बहुत आ गई क्योंकि अब उनको लगा की अब हम सबसे पहले आप हमारा नेपोटिस्म चला दो सर मैं भी आ गया हूँ मेरा भी कुछ चला दो। मैंने कहा भाई मेरे हाथ में कुछ नहीं है, मैं अपना नहीं कर पा रहा हूँ, तुम्हारा कैसे करूँ? तो अभी मुझे और और दिख रहे मैंने लास्ट एक शो किया है। जो शूट किया है उसका डाइरेक्टर आइआइटी डेल्ही का मेरा जूनियर है। उसका प्रोड्यूसर आइआइटी कानपुर का मेरा जूनियर है एंड दे हॅव नथ्थिंग वो अलग से आए हैं। मुझे लग रहा है बहुत जल्दी नया कोर्स खुलने वाला है। आइआइटी में फ़िल्म मेकिंग कोर्स खुल गया है। खुल गया एक्स्ट्रा करिकुलर में चलिए फ़िल्म क्लब और ये सब बन गए हैं वेरी गुड बट मुझे ये बताइए आप लोग में से दिनेश जी जो है उनको तो 100% गांव की जिंदगी उन्होंने देखी होगी। आप लोगों में से आप दोनों में से किस किस ने गांव देखा है और जो गांव की रियालिटीज है उनसे वाकिफ है। मैं इसका बताता हूँ ये मेरा जी बताइए नहीं, ये उसके पापा भिवानी से हैं। ठीक है तो जब भी गर्मी की छुट्टियों में दिल्ली जाते थे नानी के पास और फिर गाड़ी से भिवानी जाते थे। दादी के पास एक हफ्ता दिल्ली में रहते थे। एक हफ्ता गांव में रहते थे। गांव की लाइफ पूरी तरह से देखी है। पापा रूट है वहीं पैदा हुए अब बम्बई में रहते हैं, लेकिन रूट्स भिवानी से ही है तो उन्होंने भिवानी में काफी समय बिताया है। दिल्ली में पले बड़े हैं पर उनके पेरेंट्स दोनों हरियाणा से हैं। सो ही इस वेरी वेल लॉस्ट विथ दी विलेज लाइफ उसने सब देखा है। बहुत सेम तो आप लोगों को तो हरयाणवी आती है, दोनों को नहीं आती है। आती नहीं है। पापा एक दम ठेठ बोलते हैं, ठेठ बोलते हैं, समझ तो आ ही जाती है। देख के तो नहीं लगता तो बोलते होंगे वो ठेठ बोलते हैं एकदम अच्छा। अरे वो कुछ शिफ्ट होता है, वो मेरे पापा का भी है, वैसे बात करने में नहीं पता चलता है जैसे आप जैसे दिनेश भाई चले जाए, अपने उधर की भाषा शुरू हो जाए। अरे मिल जाएगा अगर यही पे तो फट से। आटोमेटिक हो जाएगा, उसमें आपको सोचना भी नहीं पड़ेगा राइट बहुत सारे लोगों ने आपसे ये पूछा होगा कि आपका पाला किसी झोला छाप डॉक्टर से पड़ा है, लेकिन आजकल उसकी एक नई मैं बोलेंगे? उसका एक डिफरेंट वर्शन आ गया है। अभी वो जी ए आई इंस्टाग्राम। गूगल है ना आप उसपे? तो आप मुझे बताइए कितने लोग हैं जिन्होंने जो वो देखते हैं और उसमें विश्वास करते हैं अब से शुरू करते हैं। अरे वो देखने के बाद उनको लगता है कि ये सही है। अरे मैं जीरा हूँ रे मुझे नींबू में निचोड़ पीले, ऐसा हो जाएगा तो वो देख के। फिर आपको ऐसे बताते हैं जैसे इन्होंने उसकी पढ़ाई किया हुआ है तो वह तो एक अलग ही खतरनाक चल रहा है तो सही बात है कि आप कहीं कोई नॉलेज है तो आप उसको ले लीजिए पर जिसने उसकी पढ़ाई की है, जो डॉक्टर बने हैं बिना उनके सलाह के। कुछ भी ऐसा मत कीजिये अपने शरीर के साथ की कुछ भी गलत हो जाए तो हम लोगों आपने देखके कुछ पिया है जीया ने बोलिए कुछ किया नहीं, मैं तो जब तक डॉक्टर से पूछता नहीं हूँ, मैं कुछ भी ऐसा प्रयोग नहीं करता हूँ। डॉक्टर से बिना सलाह के। क्योंकि हम लोगों ने बचपन से बहुत सारे झोला छाप डॉक्टर देखे हुए हैं तो वो नीम हकीम खतरे जान तो उससे बच के और कहीं ना कहीं हमारा शो भी यही बताता है। हमारा ग्राम चिकित्सालय है कि जीवन डॉक्टर है उसमें एक हाँ, उसमें भी झोला छाप डॉक्टर हैं। तो बिना जानकारी के और बिना किसी परामर्श के आपको कुछ ऐसा नहीं प्रयोग करना चाहिए। देखिये इसमें क्या है आज कल की जैसे आपने कहा कि हमारे जो रूट्स है हरियाणा से आपकी रूट्स है, आपकी तो रूट्स में क्या होता है? दादी, नानी? और जो बुजुर्ग लोग होते थे उनके अपने नुस्खे हुआ करते थे कि अच्छा ये लगा लो तो कलर आप कॉम्प्लेक्स आपका साफ हो जाएगा या आप ये कर लो तो आपका पेट ठीक हो जाएगा। तो जो अभी ये जो नया वर्जन डॉक्टर्स का इंस्टाग्राम और इस सब पे आता है वो कुछ उनको भी कॉपी करते हैं। शुर आप आप लोगों से मेरा सवाल है कि हम लोग आज की जेनरेशन बहुत ज्यादा इंस्टाग्राम पे रहती है। उसके बाद आपने कई बार आप भी झांसे में आते की हाँ यार मेरी नानी दादी ने तो ऐसा बताया था जरूर ये ठीक होगा आप दोनों से नहीं, अलग अलग उसके होते थे। मेरी नानी और दादी के जो हैं। वो भी कुछ अटपटाने होते थे सब अच्छे होते थे पर एक सब नानी मतलब जाना भी नहीं है वहाँ, बट सेम लाइक वाइज़ इंस्टाग्राम में भी कुछ अजीब और गरीब चीजें लोग बोलते बट कुछ इंटरेस्टिंग हैक्स होते हैं, कुछ किया है आपने देख के ऐसा इन केयर का 100% किया होगा हेयर केयर का किया होगा बिकॉज़ यू रीड इट एंड गर्ल्स ट्राई इट। और ये टिक टॉक ट्रेंड्स जो बन जाते हैं और देन यू सी यू अरे बढ़िया सो पीपल अक्चवली क्योंकि वो एक अक्चवली गुड पार्ट है क्योंकि कोई लोग कुछ अजीब एक्स्पेरमेन्ट करते और फिर उसके बारे में पोस्ट करते। ऑल दी गर्ल्स अरे डूइंग यू सो हेयर ऑर स्किन का मैंने बहुत ट्राई किया है। सर ठीक था, उसका रिसाल्ट सही था या या या रैंडम चीज़े मैं नहीं ट्राई करूँगी। कुछ इन्जेस्ट नहीं करूँगी वो सब नहीं करूँगी। कोई अंडा वंडा डालना है बाद में डाल दूंगी ट्राई करलूँगी कुछ एक्स्पेरमेन्ट सेफ साउंड करदेना अगर कोई बोले की यार सुबह सुबह नीम में नीमू निचोड़ के पीलो तो सुनने में लगता है ठीक है, ठीक है, कितना खराब हो जायेगा, ज्यादा से ज्यादा यही होगा कि उतना फायदा नहीं कर रहा होगा जितना ये बोल रहे हैं। बट खराब तो नहीं करेगा कुछ तो वो समझ है कि हाँ, नीम और नीम। हाँ ठीक है, चल सकता है ये एक्स्पेरमेन्ट किया जा सकता है एंड आई ऍम शुर, वो 5% ही सही, इतना ही कम ही सही, बट कुछ फायदा आपने वही किया कुछ और मतलब की मतलब एग्ज़ैम्पल दिया मैंने, बट इस तरह की चीज़ मैं भी पकड़ लेता हूँ की हाँ, ये ये ट्रायबल लग रहा है इसमें वो नहीं है की। भाई कोई सुनेगा या पढ़ेगा मतलब क्या कर रहा है भाई किस्से सुन के आया है, मैं खुद को जॅज नहीं करूँगा या मेरा कोई दोस्त नहीं बोलेंगे कि क्या कर रहा है आई टी जाने के बाद ये करेगा तू? कुछ चीजें ऐसी हो जाती हैं। कई बार एक दो बार ऐसा हुआ कि मैंने कुछ बोला कि मैं ट्राई करना चाहता हूँ, मेरे दोस्त ने ऐसा देखा मुझे और उसमें शर्म आ गई। से ही वास् सयिंग समथिंग आई वास् जस्ट पिक्चरिंग दट युअर पेरेंट्स सर एक आइआइटी भेजा है कॉल यू क्या कर रहा है बेटा नहीं नहीं नहीं वो नहीं नहीं दट्स ए मम्मी को लगेगा ठीक है ये कुछ कर बट ऐसी चीजें भी हो जाती है ना कि ये क्या करने लगा है ये ये तुझे क्या हो गया? बट इट हप्पेन्स आई ऍम लाइक दे गेट कैरिड अवे। एंड कई बार जवाब ढूंढ रहे होते हो। आप बहुत देस्पेरतेली जिंदगी में तो टेड़ा मेड़ा जवाब भी आपको लगता है अच्छा शायद इसी में कुछ बट मुझे बताइए हर हर जो एक क्या बोलते प्रोफेशनल होता है उनमें कॉमेडी निकलती है। ठीक है अब जब आप लोग गांव में शूट करने गए होंगे। तो कुछ आप की शूटिंग देख के भी कुछ गांव के लोगों ने कुछ शायद प्रोफेशनल इस प्रोफेशनल को देख के कुछ कॉमेडी निकली हुई कुछ ऐसे मोमेंट्स होंगे जो आपको याद होगा जहाँ पे आपको लगा हो कि आप खुद हंस पड़े हो या लोगों को हँसी आ गई हो। आप की शूटिंग के दौरान आई थिंक क्वाइट दी कंट्री बहुत बहुत वेल बिहेव्ड और रिस्पेक्टफुल क्राउड था ऐट ऑल टाइम्स। हम उनके घरो के अंदर थे सीजे मन तो मेरा वो बल्ब सीन था, वो किसी के घर के अंदर था मतलब वो दरवाजा खोलती थी निकलती था सर प्लीज़ माम् बंद कर दो अब मैं उनका बल्ब बदल रही हूँ इट वास् लिटिल लाइक दट पीपल वेर वेरी रेस्पेक्टफुल ऑफ़ बाउंडरीज अंडरस्टैंड कि शूट चल रहा है, सो वी वेर, ऑलवेज शूटिंग इन पब्लिक प्लेसेस इस बार भी हाँ आपने देखा नहीं है जो मेरा चिकित्सालय है, मैं देखने की कोशिश कर रहा हूँ ना? उसमें आवाज ही नहीं थी तो मेरे चिकित्सालय में दे गॉट रियल पीपल टु कम राइट हम वो बातें कर रहे हैं अच्छा इनको बुलाये नहीं नहीं आप शूटिंग चल रहा है लाइक पीपल अरे वेरी रेस्पेक्टफुल वेरी खाना बनाया मेमन 89 बहुत होती है हाँ हाँ। आपको घर बुला के खाना वाना खिलाया वहाँ का लोकल खाना भुला तो लेते हैं लोग आई ए लंच के घर पे शूट हो रहा था वो लोग मतलब अच्छे से पूरा एक दम अगर उनको कहे हम कि हमारा खाना अरे क्यों भईया हमारे घर पे आये तो बाहर नहीं नहीं ऐसा नहीं चले तो वो लोग तो खिलाते ही हैं। जो आपने पूछा कि वहाँ पे कुछ शूटिंग पे ऐसा एक्सपीरियंस होता है एक चीज़ बहुत वहाँ पे हम लोगों को देखने को मिलती है कोई अगर शैतान बच्चा अगर शूटिंग देखने आ गया है हाँ होता है ना कभी कभी कोई बच्चा है और वो बहुत शैतानी करने वाला बच्चा है। और उसने एक दो बार देख लिया कि जैसे ही कट बोलते हैं ना ये सब रिलैक्स हो जाते हैं तो हमारा सीन चल रहा वाटर तो हम तो क्या हो गया भाई तो फिर उसको ढूंढा जाता है। अरे कौन बोला भाई कट कौन बोला अभी तो अरे तो ऐसा हो जाता है। मुझे एक बहुत इंटरेस्टिंग किस्सा याद आ रहा है। मैं एक शूटिंग पे था और कुछ लोग जो है ना वो एक ही मात्रा नहीं बोल पाते। जैसे मेकअप तो मेकअप की जगह मेकअप बोलते हैं मतलब तो वो असिस्टेंट डॉक्टर होता है ना, डाइरेक्टर चला रहा है मेकअप तो असिस्टेंट चला रहा है मेकअप तो डाइरेक्टर ने चला मेकअप असिस्टेंट ने चला मेकअप और इतनी देर में हो गया। एक और चीज़ से पूछना चाहूंगा कि बड़ा एक चलन यूनिवर्स का चल रहा है और मैं यहाँ देख रहा हूँ कि गांव का एक यूनिवर्स बन गया है। फुलेरा गांव के लोग जो है वो आपके गांव में आ रहे हैं। सो ये क्या थॉट प्रोसेसर है? क्या वाकई में यूनिवर्स बनाने की तैयारी है? बन ही गया। आपने बोल दिया तो देख ही लिया। हम ऐसा भी नहीं है कि कोई ह्यूमर है या फ़िल्म में दिखा दिया गया है कि हाँ, वह कैरेक्टर आ रहे हैं और दिखी नहीं है। बोल ही दिया है सर ने कि बन्राकस हाँ इनको नजर नहीं है, कोई नहीं बन्राकस है और लोग ऑलरेडी एक्साइट हो गए हैं और जितना सीज़न 1 के बाद समझ में आया था की ऐसा भी नहीं है की लोग बहुत शॉक हो गए की अरे ये क्या हो गया उनको? उम्मीद थी दट। वो बहुत लोग को मांग रहे थे की यार ऐसा करो ऐसा करो। उन्होंने सीज़न 1 में भी एक्सपेक्ट किया होगा। कुछ लोगों ने ये बना ही रहे हो, तुम ले आओ। सुजा सीज़न 2 में फाइनली एक झलक आ ही गई है। अब देखते है सीज़न 3 में झलक से ज्यादा आ जाए। सीज़न 4 में मैं सजीव जी का ऑपरेशन कर रहा हूँ किसको लास्ट चीज़ पूछुंगा आपसे नेशी भोजपुरी का जो हल्ला है बहुत ज्यादा बढ़ता जा रहा है। हर नई फ़िल्म में एक गाना है, क्या बोलेंगे? इसपे की ये तो बहुत लंबे समय से पहले था, बीच में बंद हो गया था। हाँ, दिलीप साहब बच्चन साहब ने किया, उसके बाद बंद हो गया था, कम हो गया था, पंजाब की तरफ ज्यादा हो गया था तो वही मैं कहना चाह रहा हूँ कि जो फोक है चाहे वो पंजाबी हो, चाहे मराठी हो, चाहे भोजपुरी हो, गुजराती हो, राजस्थानी हो, वो फोक का ना एक अपना मज़ा है और वो जब भी। चाहे अब साउथ का भी कोई नाक, मुका, नाक, मुका, नाक कही का भी फोक आएगा तो वो आपको आनंद देगा ही देगा। तो एक समय था जब भोजपुरी का बहुत सारा आता था। फिर एक समय आया जब पंजाबी का बहुत सारा आने लगा एक बीच में। घाघरो जो घूमे वो राजस्थानी आ गया तो ये चलता रहेगा, ये घूमता रहेगा, चलता रहेगा और चुकी हमारे देश की खूबसूरती यही है कि यहाँ बहुत सारा कल्चर है, बहुत सारी भाषाएं हैं। तो ये उसका बेस्ट चीज़ ये है की उस इंडस्ट्री को एक बूस्ट मिल जाता है जो सबसे बड़ी रेवइन्यू ग्रोथ जो होती है वो बढ़ जाती है। तो मेरा ख्याल में जो आइआइटी एन एसआइ आई टी से जो निकले हुए लोग है, जैसे मैं पूछ रहा था उनसे की सब फिल्मों की तरफ जा रहे है तो एक अलग रेवइन्यू मॉडल वहाँ भी तैयार हो रहा है। जैसे भोजपुरी आप म्यूजिक की बात कर रहे थे और मेरा ख्याल में ये दो के बाद एक पहले आ चुका एक ये आ गया और और भी कोई गांव के ऊपर आसपास कुछ और नई कहानियों है। हमें लगता है कोई बहुत कहानियों है गावों में जो अभी भी दिखानी बाकी है आप पंचायत देख लिए आप ग्राम चिकित्सालय देख रहे हैं, जिला चिकित्सालय बाकी है। ट्रैवलिंग है, बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। गांव में अभी तो खैर हो गया है लेकिन बहुत जिला निगम है। बहुत सारा अभी तो मतलब जर्नल्स भी है। अभी तो सिर्फ हम थोड़ा कॉमेडी ड्रामा में है। कल क्राइम सिलर भी होना चाहिए। गांव में हाँ बहुत तगड़ा होता है वो। वो सेवेंटीज़ का अगर आप देखेंगे तो वहाँ तो फिर वो आपको डाकुओं की कहानी नजर बहुत बहुत शुक्रिया बात करने के लिए एंड ऑल दी बेस्ट थैंक यू थैंक यू थैंक यू सो मच।